नई दिल्ली। भारतीय रेल में तकनीकी सुधार एक सतत प्रक्रिया है। भारतीय रेल में लागू/परीक्षणित कुछ प्रमुख प्रौद्योगिकियां निम्नलिखित हैं:
- मशीन विज़न इंस्पेक्शन सिस्टम (एमवीआईएस): एमवीआईएस एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई)/मशीन लर्निंग (एमएल) आधारित प्रणाली है जो चलती ट्रेनों के किसी भी लटके हुए, ढीले या गायब पुर्जों का पता लगाने पर अलर्ट जारी करती है। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे में तीन (03) एमवीआईएस, समर्पित माल गलियारा निगम ऑफ इंडिया लिमिटेड (डीएफसीसीआईएल) में दो (02) और दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में मालगाड़ियों के लिए प्रायोगिक आधार पर एक (01) एमवीआईएस स्थापित की गई हैं। इसके अलावा, मालगाड़ियों के लिए सीमांत रेलवे नेटवर्क पर चार (04) एमवीआईएस शामिल करने के लिए सीमांत रेलवे और डीएफसीसीआईएल के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। साथ ही, अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (आरडीएसओ) ने उद्योग के सहयोग से रुचि की अभिव्यक्ति (ईओआई) के माध्यम से रोलिंग स्टॉक के लिए एमवीआईएस के विकास का कार्य शुरू किया है।
- व्हील इम्पैक्ट लोड डिटेक्टर (डब्ल्यूआईएलडी): डब्ल्यूआईएलडी वे-साइड निरीक्षण प्रणाली है जो रोलिंग स्टॉक में दोषपूर्ण पहिए की पहचान करने के लिए ट्रैक पर पहिए के प्रभाव को मापती है। भरतीय रेल में ऐसी 24 प्रणालियां स्थापित की गई हैं।
- रोलिंग स्टॉक की ऑनलाइन निगरानी (ओएमआरएस): ओएमआरएस एक मार्ग-तटीय निरीक्षण प्रणाली है जो रोलिंग स्टॉक के बेयरिंग और पहियों की स्थिति की निगरानी करती है। रेलवे में ऐसी 25 प्रणालियाँ स्थापित हैं, जिनमें से एक (01) ओएमआरएस दक्षिण मध्य रेलवे के सिरपुर कागज नगर/सिकंदराबाद डिवीजन में स्थापित है।
- एकीकृत ट्रैक निगरानी प्रणाली (आईटीएमएस): आईटीएमएस का उपयोग रेलवे ट्रैक के व्यापक निरीक्षण और निगरानी के लिए किया जाता है। आईटीएमएस रेल, स्लीपर और फास्टनिंग्स जैसे रेलवे ट्रैक घटकों में दोषों की निगरानी और पहचान करने के लिए मशीन लर्निंग और इमेज प्रोसेसिंग का उपयोग करता है। आईटीएमएस से प्राप्त डेटा का विश्लेषण ट्रैक के तत्काल और नियोजित रखरखाव के लिए किया जाता है। वर्तमान में, रेलवे ट्रैक की रिकॉर्डिंग और निगरानी के लिए तीन (03) आईटीएमएस तैनात हैं। यह बेहतर ट्रैक रखरखाव योजना, बढ़ी हुई सुरक्षा, ट्रैक संपत्तियों की बेहतर विश्वसनीयता और परिचालन दक्षता में सहायक है।
- ड्रोन आधारित ओवरहेड उपकरण निगरानी: रायपुर डिवीजन में पायलट आधार पर ओवरहेड उपकरण (ओएचई) की थर्मल इमेजिंग के साथ ड्रोन आधारित निगरानी शुरू की गई है। इसके अलावा, आईआर ने आईआईटी मद्रास के सहयोग से ओवरहेड उपकरण (ओएचई) के ड्रोन आधारित हवाई निरीक्षण का विकास कार्य शुरू किया है, जो एआई/एमएल का उपयोग करके कैप्चर किए गए डेटा का विश्लेषण भी करेगा।
- ट्राई-नेत्रा: आरडीएसओ ने कोहरे, बारिश और खराब मौसम के दौरान लोको चालकों की सहायता के लिए ट्राई-नेत्रा (टेरेन इमेजिंग फॉर लोकोमोटिव ड्राइवर्स- इन्फ्रारेड, एन्हांस्ड ऑप्टिकल एंड रेंजिंग डिवाइस असिस्टेड) का विकास कार्य शुरू किया है। यह प्रणाली ऑप्टिकल कैमरों, इन्फ्रारेड कैमरे और रेंजिंग उपकरणों (जैसे रडार/लिडार) और एआई से मिलकर लोको चालकों की सहायता के लिए एक वास्तविक समय, उन्नत विज़न प्रणाली बनाती है।
रेल प्रौद्योगिकी नीति: लागत प्रभावी, लागू करने योग्य और विस्तार योग्य समाधानों के विकास को बढ़ावा देने के लिए, जिनमें एआई और डेटा-संचालित प्रौद्योगिकियों पर आधारित समाधान भी शामिल हैं, भारतीय रेल सेवा द्वारा 26.02.2026 को रेल प्रौद्योगिकी नीति नामक एक नई नीति अपनाई गई है और नवप्रवर्तकों और स्टार्टअप्स की भागीदारी को सुविधाजनक बनाने के लिए एक पोर्टल (https://railtech.indianrailways.gov.in) का शुभारंभ किया गया है। प्रस्तावित रेल प्रौद्योगिकी नीति में निम्नलिखित प्रमुख विशेषताएं शामिल हैं:
- नवप्रवर्तक द्वारा प्रस्तावों का एकल-चरण विस्तृत प्रस्तुतीकरण।
- रेल प्रौद्योगिकी पोर्टल पर नवप्रवर्तक द्वारा स्वयं शुरू की गई चुनौतियों के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत करने का प्रावधान।
- भारतीय रेलवे और नवप्रवर्तक के बीच 50:50 लागत-साझाकरण के आधार पर वित्तपोषण का प्रावधान है, जिसमें प्रोटोटाइप विकास और परीक्षणों के लिए अधिकतम अनुदान दिया जाएगा।
- विस्तारित परीक्षणों या विस्तार के लिए अनुदान की पेशकश की जाती है।
उपरोक्त प्रस्तावित नीति भारतीय रेलवे में नई प्रौद्योगिकियों को शीघ्र अपनाने में सुविधा प्रदान करेगी।
केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में प्रश्नों के उत्तर में यह जानकारी दी।