शिमला। हिमाचल प्रदेश में जनजातीय मुद्दों को लेकर सियासत तेज हो गई है। भाजपा ने जनजातीय मंत्री जगत सिंह नेगी के उस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने राज्यपाल को लेकर टिप्पणी की थी। भाजपा नेता सूरत नेगी ने इसे संवैधानिक पद की गरिमा के खिलाफ बताया है। और जगत नेगी पर हमला बोलते हुए जगत नेगी का मानसिक संतुलन खोने की बात कही है।
किन्नौर से भाजपा के पूर्व प्रत्याशी सूरत नेगी ने शिमला में पत्रकार वार्ता करते हुए कहा कि जनजातीय मंत्री जगत सिंह नेगी मानसिक संतुलन खो चुके हैं और ट्राइबल मंत्री के रूप में पूरी तरह असफल साबित हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की बेतुकी बयानबाजी से मंत्री ने जनजातीय समाज के हितों को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि नौतोड़ जैसे संवेदनशील मुद्दे का समाधान करने में मंत्री विफल रहे हैं और अब अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल को निशाना बना रहे हैं। सूरत नेगी ने कहा कि नौतोड़ का मुद्दा नया नहीं है, बल्कि पिछले 20–25 वर्षों से चर्चा में है। वर्ष 2014 में कांग्रेस सरकार ने जनता को गुमराह किया। उस समय फॉरेस्ट कंजर्वेशन एक्ट, 1980 को आंशिक रूप से निलंबित करने की बात कही गई, लेकिन 2006 में लगाई गई “लैंडलेस” की शर्त को नहीं हटाया गया। उन्होंने कहा कि 2017 में जयराम ठाकुर के नेतृत्व में बनी भाजपा सरकार ने इस पूरे मामले का अध्ययन किया और उस शर्त को हटाने का रास्ता निकाला, ताकि जनजातीय क्षेत्रों के लोगों को नौतोड़ का लाभ मिल सके। हालांकि उस समय मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने के कारण तत्काल फैसला संभव नहीं हो पाया। सूरत नेगी ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के समय ट्राइबल सब प्लान के तहत लगभग 400 करोड़ रुपये का बजट तीनों जनजातीय विधानसभा क्षेत्रों के लिए रखा गया था, जिसे वर्तमान कांग्रेस सरकार ने घटाकर करीब 150 करोड़ रुपये कर दिया है। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक लाभ के लिए मंत्री राज्यपाल पर बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं।