स्कूली छात्रों से बस सुविधा छीन रही कांग्रेस सरकार : मुफ्त बस सेवा के लिए 236 रुपये का पास अनिवार्य करना शिक्षा विरोधी निर्णय-संदीपनी भारद्वाज

 

सोलन, भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने प्रदेश सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों के छात्रों के लिए दी जा रही निःशुल्क बस सुविधा समाप्त करने के निर्णय की कड़ी आलोचना करते हुए इसे छात्र विरोधी और गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाला फैसला बताया है।
संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में सरकारी स्कूलों में लगभग 8.50 लाख छात्र पढ़ते हैं, जिनमें से बड़ी संख्या दूर-दराज क्षेत्रों से रोजाना बसों के माध्यम से स्कूल पहुंचती है। पहले इन छात्रों को बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जाती थी, लेकिन अब सरकार ने यह सुविधा समाप्त कर 236 रुपये का हिम बस पास अनिवार्य कर दिया है, जो सीधे तौर पर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ाएगा।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार लगातार ऐसे निर्णय ले रही है जिससे आम जनता और विशेष रूप से गरीब परिवार प्रभावित हो रहे हैं। एक तरफ सरकार शिक्षा के क्षेत्र में बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर छात्रों को मिलने वाली सुविधाएं समाप्त कर रही है।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि प्रदेश के कई ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए कई किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। ऐसे में मुफ्त बस सुविधा समाप्त करने से हजारों परिवारों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ेगा और कई बच्चों की शिक्षा भी प्रभावित हो सकती है।
संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि प्रदेश सरकार ने पहले भी कई जनकल्याणकारी योजनाओं को बंद या सीमित किया है और अब स्कूली बच्चों की मुफ्त बस सुविधा समाप्त करना सरकार की संवेदनहीन और जनविरोधी सोच को दर्शाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार शिक्षा और जनहित के मुद्दों पर गंभीर नहीं है और केवल घोषणाओं के सहारे अपनी नाकामी छिपाने का प्रयास कर रही है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि जिस सरकार को छात्रों की सुविधाओं को बढ़ाना चाहिए था, वही सरकार बच्चों से मिलने वाली बुनियादी सुविधाएं भी छीन रही है।
संदीपनी भारद्वाज ने प्रदेश सरकार से मांग की कि वह इस निर्णय पर तुरंत पुनर्विचार करे और स्कूली छात्रों के लिए निःशुल्क बस सुविधा को बहाल करे, ताकि गरीब और दूरदराज क्षेत्रों के बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने यह निर्णय वापस नहीं लिया तो भारतीय जनता पार्टी इस मुद्दे को मजबूती से उठाएगी और छात्रों तथा अभिभावकों के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष करेगी।

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