
नई दिल्ली। कैमरून के याउंडे में आयोजित डब्ल्यूटीओ के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन के दौरान वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कनाडा के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों पक्षों के बीच यह चर्चा हाल ही में शुरू हुई भारत-कनाडा सीईपीए बातचीत में तेज़ी लाने पर केंद्रित रही।
एफटीए ढाँचे के बाहर, दोनों पक्षों ने विभिन्न क्षेत्रों में भागीदारी की रणनीति विकसित करने और जहाज निर्माण, दवा उद्योग, पर्यटन और शिक्षा क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की। सिद्धू ने मई 2026 में गोयल के प्रस्तावित कनाडा दौरे के लिए उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान वह एक बड़े भारतीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। भारत ने एयरोस्पेस, रक्षा और अंतरिक्ष जैसे उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों को कवर करने के लिए एक व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल को भारत भेजने के कनाडा के प्रस्ताव का भी समर्थन किया। दोनों मंत्रियों ने स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण के महत्व को रेखांकित करते हुए परमाणु ऊर्जा तथा कृषि और महत्वपूर्ण खनिजों सहित अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं का पता लगाने पर सहमति जताई।
एमसी-14 एजेंडा के संबंध में, मंत्रियों ने डब्ल्यूटीओ सुधारों, इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन पर सीमा शुल्क पर रोक, साथ ही साथ विकास के लिए निवेश सुविधा समझौते, विवाद समाधान और बहु-पक्षीय अंतरिम अपील मध्यस्थता व्यवस्था (एमपीआईए) को शामिल करने के बारे में अपने विचार साझा किए। भारत ने इस बात पर जोर दिया कि डब्ल्यूटीओ को एक सर्वसम्मति-आधारित संगठन बने रहना चाहिए और इसके मूलभूत सिद्धांत सुरक्षित रहने चाहिए। इसके अलावा, भारत ने कहा कि डब्ल्यूटीओ को अपने पुराने वादे अधूरे रहते हुए नए मुद्दों का रुख करने से पहले पुराने अधूरे कार्यों—विशेष रूप से कृषि क्षेत्र से संबंधित कार्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए। कनाडा ने भारत की चिंताओं को स्वीकार किया और सुझाव दिया कि दोनों देशों को विशिष्ट व्यापारिक मुद्दों पर अलग-अलग दृष्टिकोणों का सम्मान करते हुए डब्ल्यूटीओ के तहत रचनात्मक सहभागिता जारी रखनी चाहिए।