SHIMLA — हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज चुनाव की प्रक्रिया भले ही खत्म हो चुकी हो, लेकिन इसे लेकर भड़की सियासी आग दिन-दिन विकराल होती जा रही है. ताज़ा मामले में भाजपा विधायक डॉक्टर जनक राज ने प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. विधायक का आरोप है कि सरकार ने गुपचुप तरीके से चुनावी प्रक्रिया के बीच एक्ट में संशोधन किया और अधिसूचना जारी कर जिला चंबा, लाहौल-स्पीति और कल्लू की कुछ पंचायतों में प्रधान, बीडीसी सदस्य और जिला परिषद सदस्यों का कार्यकाल अक्टूबर तक बढ़ा दिया. ऐसे में अब इन पंचायत में दो-दो प्रतिनिधि हो गए हैं. जनक राज ने कहा कि सरकार का ये फैसला सीधे तौर पर पंचायती राज संस्थाओं और संविधान का अपमान है. उन्होंने राज्य सरकार के इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय जाने की चेतावनी दी है.
<span;><span;>- डॉ. जनक राज ने कहा कि देश में पंचायती राज संस्थाएं संवैधानिक प्रावधान के तहत काम कर रही हैं. लेकिन, प्रदेश की वर्तमान कांग्रेस सरकार ने संविधान और संवैधानिक व्यवस्थाओं का मजाक बना दिया है, जो प्रदेश में हुए पंचायती राज चुनाव के समय स्पष्ट हो गया है. डॉ जनक राज ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने चुनावी प्रक्रिया के बीच गुपचुप तरीके से एक्ट में संशोधन किया और 6 जून को एक अधिसूचना जारी की. इस अधिसूचना में कहा गया कि जिला चंबा के पांगी, लाहौल स्पीति के केलांग सब-डिवीजन और कल्लू की चार पंचायतों के पंचायत प्रधान, बीडीसी और जिला परिषद सदस्य 18 अक्टूबर 2026 तक अपना कार्यकाल जारी रख सकेंगे. उन्होंने कहा कि यह फैसला पंचायती राज संस्थाओं का मजाक है. साथ ही उन्होंने चेतावनी दी की सरकार ने फैसला वापस नहीं लिया तो वह न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे. वहीं, BDC, जिलापरिषद और शहरी निकायों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव में देरी को लेकर भाजपा विधायक डॉ. जनक राज ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. डॉ. जनक राज ने कहां की इसके पीछे प्रदेश सरकार की केवल एक रणनीति है कि चुने हुए प्रतिनिधियों को डरा धमका कर या प्रताड़ित करके अपने विचारधारा के लोगों को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बनाया जा सके. जनक राज ने कहा कि ये साफ तौर पर जन मत का मज़ाक है.