शिमला। मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने कहा है कि मानसून के दौरान हिमाचल प्रदेश में कुछ स्थानों पर बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं होना सामान्य बात है, लेकिन इसे व्यापक संकट या ट्रेंड के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अधिकांश पर्यटन स्थल पूरी तरह सुरक्षित हैं और पर्यटकों को अनावश्यक रूप से डरने की जरूरत नहीं है।
नरेश चौहान ने कहा कि मीडिया में कुछ क्षेत्रों की आपदा संबंधी खबरें प्रमुखता से आने के कारण पर्यटकों में पूरे हिमाचल को लेकर भय का माहौल बन जाता है, जबकि वास्तविकता यह है कि केवल कुछ इलाकों में ही बारिश से नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और प्रशासन प्रभावित लोगों के साथ खड़े हैं तथा अधिकांश सड़कें खुली हुई हैं। हालांकि लोगों को नदी-नालों के किनारे जाने से बचना चाहिए।
नगर परिषदों और नगर समितियों में अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के चुनाव में देरी को लेकर भाजपा के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि जहां किसी दल को स्पष्ट बहुमत मिला है, वहां लोकतांत्रिक तरीके से अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल में लोकतंत्र की हत्या नहीं हो रही, बल्कि देश में लोकतंत्र खतरे में है, जहां चुने हुए जनप्रतिनिधियों को एजेंसियों का भय दिखाकर तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर द्वारा सिराज क्षेत्र में आपदा प्रभावितों को मुआवजा न मिलने के आरोपों पर नरेश चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार से अपेक्षित सहायता नहीं मिल रही है। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार अपने संसाधनों से प्रभावित लोगों को 7 -7 लाख रुपये से अधिक का मुआवजा दे चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा हिमाचल के लिए घोषित 1500 करोड़ रुपये की सहायता राशि का अब तक कोई पता नहीं है और भाजपा को बताना चाहिए कि वह राशि कहां गई।
राम मंदिर चंदा चोरी मामले पर उन्होंने इसे अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताते हुए कहा कि मंदिर से करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। उनका आरोप था कि पिछले तीन वर्षों से मंदिर में चोरी की घटनाएं होती रही हैं और इसकी गहन जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे का भी पूरा हिसाब जनता के सामने आना चाहिए।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के दिल्ली दौरे पर उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री प्रदेश के हितों और अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए लगातार केंद्र सरकार के समक्ष हिमाचल का पक्ष रख रहे हैं और इसी उद्देश्य से दिल्ली जाते हैं।