निदेशक (परियोजनाएं) राजेश कुमार चंदेल ने किया नाथपा झाकड़ी हाइड्रो पावर स्टेशन का दौरा

झाकड़ी: एसजेवीएन के निदेशक (परियोजनाएं) राजेश कुमार चंदेल ने 6 सितंबर 2026 को एसजेवीएन के 1500 मेगावाट नाथपा झाकड़ी हाइड्रो पावर स्टेशन का दौरा किया। दौरे का मुख्य उद्देश्य परियोजना में विद्युत उत्पादन की स्थिति की समीक्षा करने के साथ-साथ उत्पादन दक्षता, परिचालन व्यवस्था, अनुरक्षण गतिविधियों एवं सुरक्षा मानकों का समग्र जायजा लेना रहा।
परियोजना में पहुंचने पर परियोजना प्रमुख राजीव कपूर ने निदेशक (परियोजनाएं) का पारंपरिक हिमाचली रीति-रिवाज से स्वागत किया। इस अवसर पर परियोजना के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
दौरे के दौरान चंदेल ने परियोजना के विभिन्न महत्वपूर्ण स्थलों का निरीक्षण किया तथा विद्युत उत्पादन से संबंधित गतिविधियों, संयंत्र के संचालन एवं अनुरक्षण व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने पावर हाउस, नियंत्रण कक्ष सहित हाइड्रो प्लांट का निरीक्षण कर परियोजना की वर्तमान परिचालन स्थिति एवं उत्पादन व्यवस्था का प्रत्यक्ष अवलोकन किया।
परियोजना प्रमुख राजीव कपूर ने निदेशक (परियोजनाएं) को परियोजना के विद्युत उत्पादन की वर्तमान स्थिति, मशीनों की उपलब्धता, अनुरक्षण कार्यों तथा विभिन्न तकनीकी एवं परिचालन पहलुओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी। इस दौरान परियोजना के सुचारू संचालन, उत्पादन क्षमता के प्रभावी उपयोग तथा आगामी अवधि की कार्ययोजना पर भी चर्चा की गई।
इस अवसर पर निदेशक (परियोजनाएं) राजेश कुमार चंदेल ने परियोजना के अधिकारियों एवं तकनीकी कर्मचारियों द्वारा सुरक्षित एवं विश्वसनीय विद्युत उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि नाथपा झाकड़ी हाइड्रो पावर स्टेशन एसजेवीएन की एक महत्वपूर्ण परियोजना होने के साथ-साथ देश की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने कहा कि जल विद्युत परियोजनाओं में उत्पादन के साथ सुरक्षा, दक्षता और उपकरणों की विश्वसनीयता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
इस दौरान उन्होंने प्रकृति के संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी सुनिश्चित करने हेतु पौधारोपण भी किया। उन्होंने चंभु देवता महाराज मंदिर में दर्शन कर परियोजना की सफलता एवं समृद्धि के लिए मन्नत भी मांगी।
अंत में उन्होंने अधिकारियों को उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए परियोजना की उत्पादन क्षमता एवं दक्षता को निरंतर बनाए रखने तथा अनुरक्षण कार्यों को निर्धारित मानकों के अनुरूप सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।