आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए जनभागीदारी और सामुदायिक जागरूकता जरूरी

कुल्लू।अंतरराष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस के अवसर पर जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) कुल्लू द्वारा होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा विभाग, नेहरू युवा केंद्र संगठन तथा बाल रक्षा भारत के सहयोग से बहुउद्देशीय भवन स्थित प्रशिक्षण हॉल में अर्धदिवसीय जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें आपदा मित्रों, नेहरू युवा केंद्र और राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के स्वयंसेवकों सहित प्रदूषण नियंत्रण विभाग के प्रतिनिधि ने भाग लिया। कार्यशाला में आपदा जोखिम न्यूनीकरण, आपदा पूर्व तैयारियों, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, सुरक्षित व्यवहार तथा आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया के महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम के दौरान आपदा प्रबंधन में जनभागीदारी और प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की भूमिका पर विशेष बल दिया गया। प्रतिभागियों को अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों को संभावित आपदाओं के प्रति जागरूक करने तथा आपातकालीन परिस्थितियों में स्थानीय स्तर पर प्रभावी सहायता प्रदान करने के लिए प्रेरित किया गया। इस दौरान बताया गया कि किसी भी आपदा की स्थिति में स्थानीय समुदाय और प्रशिक्षित स्वयंसेवक प्रारंभिक प्रतिक्रिया, राहत एवं बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आपदा जोखिम कम करने के लिए सामुदायिक सहभागिता, पर्यावरण संरक्षण और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय को भी आवश्यक बताया गया। डीडीएमए कुल्लू ने सहयोगी संस्थानों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आपदा-सुरक्षित समाज के निर्माण के लिए जन-जागरूकता, सामूहिक प्रयास और निरंतर प्रशिक्षण अत्यंत आवश्यक हैं।
भुंतर के पंचायत प्रतिनिधियों को सिखाए प्राथमिक उपचार और सीपीआर के गुर
इसी कड़ी में डीडीएमए कुल्लू द्वारा होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा विभाग तथा बाल रक्षा भारत के सहयोग से भुंतर विकास खंड के पंचायती राज संस्थानों के प्रतिनिधियों के लिए भी अर्धदिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसका उद्देश्य पंचायत प्रतिनिधियों को आपदा प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं से अवगत करवाने के साथ आपातकालीन परिस्थितियों में प्रभावी प्रतिक्रिया के लिए आवश्यक व्यावहारिक जानकारी और कौशल प्रदान करना था।
कार्यशाला में पंचायत प्रतिनिधियों को आपदा पूर्व तैयारियों, त्वरित प्रतिक्रिया और स्थानीय स्तर पर आपदा जोखिम कम करने के उपायों की जानकारी दी गई। होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा विभाग के प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को प्राथमिक उपचार की विभिन्न तकनीकों तथा कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) का प्रशिक्षण भी प्रदान किया। इस दौरान बताया गया कि आपातकालीन परिस्थितियों में समय पर प्राथमिक उपचार और सीपीआर किसी व्यक्ति का जीवन बचाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
कार्यशाला में पंचायतों को स्थानीय स्तर पर आपदा प्रबंधन की महत्वपूर्ण इकाई बताते हुए प्रतिनिधियों से अपने क्षेत्रों में जन-जागरूकता बढ़ाने, स्थानीय संसाधनों की पहचान करने तथा स्वयंसेवकों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने का आह्वान किया गया। डीडीएमए कुल्लू ने बताया कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय समुदायों की क्षमता को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि आपदा के समय जान-माल की हानि को न्यूनतम किया जा सके तथा एक सुरक्षित एवं आपदा-सक्षम समाज का निर्माण हो सके।