397 कैंसर दवाओं के दाम घटे, 93% तक राहत- रणधीर शर्मा

 

₹1,422 करोड़ की स्वास्थ्य परियोजना और ₹2,006 करोड़ की आपदा सहायता के इस्तेमाल पर कांग्रेस सरकार से सवाल

शिमला। भाजपा विधायक और प्रदेश मीडिया प्रभारी रणधीर शर्मा ने कैंसर की 397 दवाओं की कीमतों में कटौती को मरीजों के लिए बड़ी राहत बताया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के इस फैसले से कैंसर के इलाज पर होने वाला खर्च कम होगा। वहीं, रणधीर शर्मा ने हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर केंद्र से मिली स्वास्थ्य परियोजनाओं की राशि और आपदा राहत के तहत स्वीकृत धन के इस्तेमाल में लापरवाही बरतने के आरोप लगाए हैं। रणधीर शर्मा ने 29 अक्टूबर को शिमला में प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि 27 अक्टूबर को जारी संशोधित मूल्य सूची के अनुसार, कैंसर से जुड़ी 543 दवाओं में से 397 की अधिकतम खुदरा कीमतों में कमी की गई है। उन्होंने इस फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा का आभार जताया।

रणधीर शर्मा ने बताया कि पाल्बोसिक्लिब 125 एमजी की एक दवा की कीमत 40,421 रुपये से घटकर 2,730 रुपये रह गई है। यानी इसकी कीमत में करीब 93.25 प्रतिशत की कमी हुई है। इसी तरह पाल्बोसिक्लिब 100 एमजी की कीमत 24,505 रुपये से घटकर 2,069 रुपये और थायोटेपा 100 एमजी की कीमत 80,072 रुपये से घटकर 7,150 रुपये हो गई है। उन्होंने कहा कि कैंसर के महंगे इलाज के कारण कई परिवारों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में दवाओं की कीमतों में कटौती से मरीजों और उनके परिवारों को राहत मिलेगी। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से इस फैसले का स्वागत करने और भाजपा कार्यकर्ताओं से नई कीमतों की जानकारी लोगों तक पहुंचाने की अपील की।

रणधीर शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में 320 अतिरिक्त पीजी मेडिकल सीटों को मंजूरी दी है। इसके लिए करीब 415 करोड़ रुपये की सहायता का प्रावधान भी किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार केंद्र सरकार की उपलब्धियों का श्रेय खुद लेने की कोशिश कर रही है। उन्होंने 1,422 करोड़ रुपये की स्वीकृत जायका स्वास्थ्य परियोजना का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश की जनता को इसका लाभ पहुंचाने में सरकार अपेक्षित प्रगति नहीं कर पाई है। उन्होंने पीएम-अभीम योजना के तहत क्रिटिकल केयर ब्लॉक और ब्लॉक सार्वजनिक स्वास्थ्य इकाइयों के निर्माण की धीमी गति पर भी सवाल उठाए।
इसके अलावा, उन्होंने आरोप लगाया कि 15वें वित्त आयोग के तहत स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए स्वीकृत 521 करोड़ रुपये का भी समुचित इस्तेमाल नहीं हुआ है।

रणधीर शर्मा ने ऊना के बल्क ड्रग पार्क की परियोजना में देरी और मेडिकल डिवाइस पार्क परियोजना से पीछे हटने के फैसले को रोजगार और निवेश की संभावनाओं के लिए नुकसानदायक बताया। रणधीर शर्मा ने आपदा पुनर्निर्माण के लिए पीडीएनए के तहत स्वीकृत करीब 2,006 करोड़ रुपये के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इन पैसों से होने वाले कार्यों में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। उन्होंने पांच-पांच लाख रुपये के कार्यों के आवंटन और भुगतान की जांच कराने की मांग की।

भाजपा विधायक ने 15वें वित्त आयोग के तहत पंचायतों को मिलने वाले अनुदान के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पेयजल से जुड़े टाइड ग्रांट का पैसा पंचायतों के बजाय जल शक्ति विभाग को सौंपा गया और कुछ राशि का इस्तेमाल तय उद्देश्यों से अलग किया गया। उन्होंने मांग की कि 16वें वित्त आयोग के तहत मिलने वाली राशि पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के माध्यम से निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार खर्च की जाए। रणधीर शर्मा ने चेतावनी दी कि यदि स्थानीय निकायों के वित्तीय अधिकारों की अनदेखी की गई तो भाजपा जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर आंदोलन करेगी।

 

पीडीएनए के पैसे से कांग्रेस समर्थित ठेकेदार मना रहे दिवाली: रणधीर शर्मा

हिमाचल प्रदेश में आपदा पुनर्निर्माण के लिए केंद्र सरकार से मिली करीब 2,006 करोड़ रुपये की सहायता राशि को लेकर भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भाजपा विधायक और प्रदेश मीडिया प्रभारी रणधीर शर्मा ने आरोप लगाया कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में सड़कों और बुनियादी ढांचे की बहाली का इंतजार हो रहा है, जबकि पीडीएनए की राशि से कांग्रेस समर्थित ठेकेदार दिवाली मना रहे हैं। उन्होंने पांच-पांच लाख रुपये के कार्यों के आवंटन और भुगतान में कथित अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की है।

रणधीर शर्मा ने 29 अक्टूबर को शिमला में प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश में आपदा से क्षतिग्रस्त सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचे को बहाल करने के लिए पीडीएनए के तहत करीब 2,006 करोड़ रुपये की सहायता स्वीकृत की है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस राशि के आवंटन और खर्च को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

रणधीर शर्मा ने कहा कि पहले एक लाख रुपये से अधिक के कार्यों के लिए ऑनलाइन निविदा की व्यवस्था थी, लेकिन पीडीएनए के कार्यों में इस सीमा को बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दिया गया। उन्होंने आशंका जताई कि इससे कार्यों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर पसंदीदा ठेकेदारों को फायदा पहुंचाया जा सकता है।

भाजपा विधायक ने आरोप लगाया कि पांच-पांच लाख रुपये के कार्य आवंटित किए जा रहे हैं। कुछ जगहों पर काम पूरा होने से पहले ही बिलों का भुगतान किए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार से सवाल किया कि पीडीएनए के तहत अब तक कितने कार्य स्वीकृत हुए, कितने पूरे किए गए और कितनी राशि का भुगतान किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि आपदा पुनर्निर्माण के लिए मिली राशि का इस्तेमाल तय उद्देश्यों के अनुसार हो रहा है या राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोगों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

रणधीर शर्मा ने प्रदेश सरकार से पीडीएनए के तहत स्वीकृत सभी कार्यों की विधानसभा क्षेत्रवार सूची सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को निविदा प्रक्रिया, ठेकेदारों के नाम, कार्यों की प्रगति और किए गए भुगतान का पूरा विवरण जनता के सामने रखना चाहिए। उन्होंने अनियमितताओं की शिकायत वाले कार्यों का स्वतंत्र तकनीकी और वित्तीय ऑडिट कराने की भी मांग की।

रणधीर शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार से मिलने वाली आपदा सहायता प्रदेश की जनता का अधिकार है और इसका एक-एक रुपया आपदा प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण पर खर्च होना चाहिए।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कांग्रेस सरकार ने आरोपों पर संतोषजनक जवाब नहीं दिया और पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की, तो भाजपा इस मुद्दे को विधानसभा से लेकर जनता के बीच उठाएगी। उन्होंने कहा कि आपदा पीड़ितों के नाम पर मिलने वाली राशि के इस्तेमाल में किसी भी तरह की अनियमितता स्वीकार नहीं की जा सकती। सरकार को इस धनराशि के खर्च का पूरा हिसाब देना चाहिए।