तेल का खेल ,मिडल ईस्ट में तनाव,भारत मे पड़ी आर्थिक बोझ की मार,₹3 की हुई बढ़ोतरी

 

शिमला। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में देशभर में ₹3 से ₹3.29 प्रति लीटर तक की बड़ी बढ़ोतरी की गई है जो चार वर्ष बाद सबसे बड़ी बढ़ोतरी है यह वृद्धि पश्चिमी एशिया में जारी तनाव के कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बाद हुई है। जहां पूरे देश भर में में जनता पहले ही महंगाई की मार से जूझ रही है वही तेल के खेल ने लोगों की कमर तोड़ दी है।शिमला में भी पेट्रोल की कीमत अब ₹98.26 व डीजल के दाम 90.09 पहुंच गए हैं।इस बढ़े दामों पर जनता का साफ़ कहना है कि छोटे स्तर पर भले ही ये बदलाव मामूली लगे, लेकिन बड़े स्तर पर… जब इसका असर माल ढुलाई और ट्रांसपोर्टेशन पर पड़ेगा, तो थाली की सब्ज़ी से लेकर हर बुनियादी चीज़ महंगी हो जाएगी। यानी, जेब पर सीधा असर देखने को मिलेगा

​ पेट्रोल पंप पर खड़े अनिरुद्ध ने कहा कि वैसे ₹3कोई बड़ी कीमत नही लेकिन अगर इसे वर्ष भर के खर्चे के रूप में देखा जाए तो यह बहुत बड़ी राशि है क्योंकि अगर महीने में चार या पांच बार पेट्रोल डलवाया जाता है तो यह खर्चा सामने दिखता है उन्होंने कहा कि जिस तरह के मिडिल ईस्ट में हालात हैं तो यह उम्मीद थी कि 10 से ₹15 की बढ़ोतरी होगी लेकिन ₹3 की बढ़ोतरी हुई है यह ठीक है।गरीब और मध्यवर्ग पर इसका असर ज्यादा पड़ेगा ।लेकिन इस मूददे पर सरकार भी कुछ नही कर सकती
इसके साथ रविंदर ने कहा कि पेट्रोल और डीजल पर ही आज के दौर में सारी आर्थिकी निर्भर है क्योंकि सभी वस्तुए ट्रांसपोर्ट के माध्यम से आती है अगर तेल के दाम बढ़े हैं तो महंगाई में इसका असर जरूर देखने को मिलेगा।

वही पेट्रोल पंप में पेट्रोल भरवाने पहुंचे टैक्सी चालक व अन्य लोगों ने कहा कि पेट्रोल और डीजल की मार जरूर जनता पर पड़ी है ।पहले ही महंगाई है ऊपर से तेल के दाम बढ़ने से मुश्किल और बढ़ गयी हैं।वही टैक्सी चालकों ने भी कहा कि टैक्सी के भी खर्चे होते हैं उसके साथ तेल के दामो में बढ़ोतरी का होना महंगाई का बढ़ना है इसका सीधा असर लोगों पर पड़ेगा ।अब उन्हें भी टैक्सी के दामों में भी बढ़ोतरी करनी पड़ेगी।

​लेकिन सवाल ये है कि आखिर ये आग लगी क्यों? क्या वाकई सरकार बेबस है?
​जानकारों की मानें तो इस बार सरकार के हाथ भी बंधे हुए हैं। ग्लोबल मार्केट में जो आग लगी है, उसका धुआं हमारे देश तक पहुंच रहा है। मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और संकट की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें रॉकेट हो चुकी हैं। जब दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक क्षेत्र में हलचल होगी, तो उसकी तपिश से हम और आप कैसे बच सकते हैं?

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